तुम्हारी हिम्मत

छोटू

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Thursday, June 30, 2016

डॉक्टर्स-डे विशेष



डॉक्टर्स-डे : महान भारतीय डॉ. बिधानचंद्र राय का जन्म दिवस एकजुलाई को मनाया जाता है। उनका जन्म 1882 में बिहार के पटना जिले में हुआ था। कोलकाता में चिकित्सा शिक्षा पूर्ण करने के बाद डॉ. राय ने एमआरसीपी और एफआरसीएस की उपाधि लंदन से प्राप्त की। 




1911 में उन्होंने भारत में चिकित्सकीय जीवन की शुरुआत की। इसके बाद वे कोलकाता मेडिकल कॉलेज में व्याख्याता बने। वहाँ से वे कैंपबैल मेडिकल स्कूल और फिर कारमिकेल मेडिकल कॉलेज गए। उनकी ख्याति एक शिक्षक एवं चिकित्सक के रूप में नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानी के रूप में महात्मा गाँधी के साथ असहयोग आंदोलन में शामिल होने के कारण बढ़ी। 


भारतीय जनमानस के लिए प्रेम और सामाजिक उत्थान की भावना डॉ. राय को राजनीति में ले आई। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य बने और बाद में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का पद संभाला। डॉ. राय को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था। उनके जन्म दिवस को डॉक्टर्स डे के रूप में मनाया जाता है।




अपने पेशे से चिंतित : 
आजकल व्यावसायिकता की अंधी दौड़ में शामिल हो चुके चिकित्सकों को भी अब अपने पेशे को लेकर चिंता सताने लगी है। हालाँकि इस पेशे में बढ़ती व्यवसायिकता से सीनियर डॉक्टर काफी आहत हैं। लेकिन कुछ ऐसे डॉक्टर भी है जो अभी भी डॉक्टर पेशे के रूप में सेवाभाव जिंदा है। उन्हें फिर पुराने समय के लौटने की उम्मीद है। 



जनता के विश्वास की डोर है डॉक्टर : वर्तमान में डॉक्टरी ही एक ऐसा पेशा है, जिस पर लोग विश्वास करते हैं। इसे बनाए रखने की जिम्मेदारी सभी डॉक्टरों पर है। डॉक्टर्स डे स्वयं डॉक्टरों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि यह उन्हें अपने चिकित्सकीय प्रैक्टिस को पुनर्जीवित करने का अवसर देता है। 

सारे डॉक्टर जब अपने चिकित्सकीय जीवन की शुरुआत करते हैं तो उनके मन में नैतिकता और जरूरतमंदों की मदद का जज्बा होता है, जिसकी वे कसम भी खाते हैं। इसके बाद कुछ लोग इस विचार से पथभ्रमित होकर अनैतिकता की राह पर चल पड़ते हैं। डॉक्टर्स डे के दिन डॉक्टरों को यह मौका मिलता है कि वे अपने अंतर्मन में झाँके, अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को समझें और चिकित्सा को पैसा कमाने का पेशा न बनाकर मानवीय सेवा का पेशा बनाएँ, तभी हमारा यह डॉक्टर्स डे मनाना सही साबित होगा।

विधाता

भगवान के बाद कोई  विधाता है,
 तो वो किसान हैं .!!


रास्ते और भी हैं

कारवाँ के चलने से , कारवाँ के रुकने तक 

,
मंजिलें नहीं...यारा......इंसानों के रास्ते बदल जातें है ..!!

रास्ते और भी हैं 

झूठे अभिमान

"अक्सर हम जिंदगी में अपने बहुमूल्य रिश्तों को अपने झूठे अभिमान की आग में जला कर नष्ट कर देते है"
















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 जिस धागे की, गांठे खुल सकती हैं,

उस धागे पर कैंची नहीं चलानी चाहिए !

किसी की कोई बात बुरी लगे तो ,

दो तरह से सोचे,

यदि व्यक्ति महत्वपूर्ण है ,

तो बात भूल जाए और ,

यदि बात महत्वपूर्ण है तो ,

व्यक्ति को भूल जाए ।। 





Wednesday, June 29, 2016

मोह


मोह सबसे बुरा रोग है।
 
ये हमें कई बार उन चीजों से भी अलग नहीं होने देता 

जो भविष्य में हमारे लिए ही विनाशकारी हो सकती हैं। 

- वेद व्यास

कोशिश



*कोशिश*


आखरी सांस तक करनी चाहिये...


*मंजिल* मिले या *तजुर्बा*


चीज़े दोनों ही नायाब है !!


 



पेन्सिल और इररेज़र का जीवन

ये जीवन है:


पेन्सिल ने अफ़सोस के साथ इररेज़र से कहा कि मेरी गलतियों को मिटाने के लिए तुम्हे हर बार अपना एक हिस्सा कुर्बान कर देना पड़ता है | इररेज़र (लिखा हुआ मिटने वाला रबर } बोला यही तो मेरा काम है, जिसमे मेरी सार्थकता है | मै बिना घिसे रह गया तो मेरे होने का क्या मतलब ! हम भी इररेज़र की तरह है | यदि समय, उर्जा, धन, आनंद शरीर खो देने डर से कुछ अच्छा न करे तो हमारे होने का क्या अर्थ है |





Friday, June 24, 2016

खुबसूरत सोच


एक खूबसूरत सोच :


अगर कोई पूछे जिंदगी में क्या खोया और क्या पाया,

तो बेशक कहना, जो कुछ खोया वो मेरी नादानी

थी और जो भी पाया वो प्रभू की मेहेरबानी थी,

खुबसूरत रिश्ता है मेरा और भगवान के बीच में,

ज्यादा मैं मांगता. नहीं और कम वो देता नहीं.. I


खामोश लोग


ये दुनिया इसलिए बुरी नही कि ,

यहाँ बुरे लोग ज्यादा है.,
.
.
बल्कि,
.
.
इसलिए बुरी है कि ,


यहाँ अच्छे लोग खामोश है..!! 😕😕



"वक़्त"

"वक़्त"  हर "वक़्त" को बदल देता हैं...!

सिर्फ "वक़्त" को थोड़ा  "वक़्त" देने  की जरुरत हैं..!



RsOnlyRitu_Sharma